
रायपुर
राज्योत्सव 2026 के शिल्प ग्राम में छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोककला, पारंपरिक शिल्प और प्राचीन सांस्कृतिक विरासत की अनूठी झलक देखने को मिल रही है। यहां मिट्टी से बनी कलाकृतियां, पारंपरिक बर्तन, आकर्षक मूर्तियां और अन्य हस्तनिर्मित वस्तुएं लोगों को खूब पसंद आ रही हैं। शिल्प ग्राम में पहुंचने वाले लोग इन कलाकृतियों को न केवल उत्सुकता से देख रहे हैं, बल्कि इनके निर्माण की परंपरा और पुराने समय में इनके उपयोग के बारे में भी जानकारी ले रहे हैं।
शिल्प ग्राम में प्रदर्शित मिट्टी के पारंपरिक बर्तन लोगों को उस दौर की याद दिला रहे हैं, जब मिट्टी से बने घड़े, सुराही, मटके, कुल्हड़, हांडी और अन्य घरेलू वस्तुएं दैनिक जीवन का अभिन्न हिस्सा हुआ करती थीं। आधुनिक सुविधाओं और नए जमाने के बर्तनों के बीच इन पारंपरिक वस्तुओं को देखकर नई पीढ़ी भी यह जानने के लिए उत्सुक नजर आ रही है कि पहले के समय में लोग किस तरह मिट्टी के बर्तनों का उपयोग करते थे। इन कलाकृतियों के माध्यम से लोग हमारी पुरानी जीवनशैली, स्थानीय कारीगरों के हुनर और पारंपरिक ज्ञान से रूबरू हो रहे हैं।
आगामी दीपावली पर्व को देखते हुए शिल्प ग्राम में मिट्टी के दीयों और कलात्मक मूर्तियों का विशेष आकर्षण है। पारंपरिक मिट्टी के दीयों के साथ ही विभिन्न आकारों और आकर्षक रूपों में तैयार की गई मूर्तियां लोगों मुग्ध कर रही हैं। पर्यावरण के अनुकूल और स्थानीय कारीगरों के हाथों से तैयार इन वस्तुओं के प्रति लोगों की रूचि यह जाहिर करती है कि आधुनिकता के दौर में भी पारंपरिक उत्पादों का महत्व कम नहीं हुआ है। दीपावली पर घरों को मिट्टी के दीयों से रोशन करने और मिट्टी की कलात्मक मूर्तियों से सजाने की परंपरा आज भी लोगों के मन में विशेष स्थान रखती है।
शिल्प ग्राम में प्राचीन कलाकृतियों का प्रदर्शन केवल खरीदारी और मनोरंजन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ने का भी एक महत्वपूर्ण माध्यम बन रहा है। यहां आने वाले लोग पारंपरिक शिल्पकला को करीब से समझ रहे हैं और कारीगरों की मेहनत, रचनात्मकता तथा पीढ़ियों से चली आ रही कला परंपरा की सराहना कर रहे हैं।
शासन द्वारा शिल्पकारों को प्रोत्साहन दिया जा रहा है। राज्योत्सव का शिल्प ग्राम इस तरह हमारी प्राचीन विरासत और आधुनिक जीवन के बीच एक सुंदर सेतु बनकर उभरा है। मिट्टी की इन कलाकृतियों में केवल शिल्पकारों का कौशल ही नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की संस्कृति, परंपरा और लोकजीवन की आत्मीय झलक भी समाहित है। साथ ही, इन पारंपरिक उत्पादों के प्रति बढ़ता आकर्षण स्थानीय कुम्हारों और हस्तशिल्प कलाकारों को प्रोत्साहन देने तथा उनकी कला को नई पहचान दिलाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।





