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ट्विशा दहेज हत्या केस में CBI की एंट्री तेज, आज समर्थ की कस्टडी लेकर WhatsApp-Call रिकॉर्ड खंगालेगी टीम

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भोपाल 

ट्विशा शर्मा की मौत मामले में अब केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने केस दर्ज कर लिया है और आगे की जांच करेगी. सीबीआई ने ट्विशा के पति समर्थ और सास के खिलाफ मामला दर्ज किया है. इससे पहले सोमवार (25 मई) को एजेंसी ने जांच का जिम्मा संभालने और आवश्यक दस्तावेज और सबूत जुटाने के लिए भोपाल में एक स्पेशल क्राइम यूनिट भेजी। 

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मुलाकात के बाद, सीबीआई ने प्रक्रिया के अनुसार, भोपाल पुलिस की एफआईआर को पुनः दर्ज किया, जिसमें समर्थ सिंह और गिरिबाला सिंह को आरोपी बनाया गया था। 

सीबीआई के हाथ में आई जांच, नई टीम गठित
ट्विशा शर्मा की संदिग्ध मौत के मामले में सीबीआई ने औपचारिक रूप से जांच शुरू कर दी है. भोपाल के कटारा हिल्स थाने में पहले दर्ज एफआईआर को एजेंसी ने री-रजिस्टर किया है. इस मामले की जांच दिल्ली में पदस्थ एसपी राजबीर सिंह के नेतृत्व में की जाएगी, वहीं डीएसपी निशु कुशवाहा को जांच अधिकारी (आईओ) नियुक्त किया गया है. सीबीआई टीम अब पूरे मामले की नई सिरे से पड़ताल करेगी।

 आज समर्थ सिंह की कस्टडी लेगी CBI
सूत्रों के अनुसार, सीबीआई बुधवार को मुख्य आरोपी समर्थ सिंह को कस्टडी में लेकर पूछताछ शुरू कर सकती है. एजेंसी डिजिटल और फॉरेंसिक साक्ष्यों के आधार पर उससे गहन पूछताछ करेगी. सीबीआई की नजर व्हाट्सएप चैट्स, कॉल डिटेल्स और पोस्टमार्टम रिपोर्ट पर है, जिनके जरिए घटनाक्रम की पूरी कड़ी जोड़ने की कोशिश की जाएगी। 

12 मई को हुई थी संदिग्ध मौत
यह मामला भोपाल के कटारा हिल्स इलाके का है, जहां 12 मई 2026 की रात करीब 10:20 बजे ट्विशा शर्मा की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत की सूचना पुलिस को मिली थी. शुरुआती जांच में सामने आया कि ट्विशा की मौत फांसी लगाने से हुई. पोस्टमार्टम रिपोर्ट में ‘एंटेमॉर्टम हैंगिंग' यानी जीवित अवस्था में फांसी की पुष्टि हुई, लेकिन शरीर पर चोटों के निशान मिलने से मामला और संदिग्ध हो गया। 

गिरिबाला सिंह का आरोप, ट्विशा को ड्रग्स की लत थी
ट्विशा (33) का शव 12 मई को भोपाल के कटारा हिल्स इलाके में उनके ससुराल में फंदे से लटका मिला था. उनके परिवार ने ससुराल वालों पर दहेज उत्पीड़न और आत्महत्या के लिए उकसाने का आरोप लगाया है. वहीं, ट्विशा के ससुराल वालों ने दावा किया कि उसे मादक पदार्थों की लत थी। 

दहेज और प्रताड़ना के गंभीर आरोप
मृतका के परिजनों ने पति समर्थ सिंह और सास गिरीबाला सिंह पर गंभीर आरोप लगाए हैं. शिकायत में कहा गया है कि शादी के बाद से ही ट्विशा को दहेज के लिए परेशान किया जाता था. बताया गया कि शादी के दौरान करीब 2 लाख रुपए का दबाव डालकर लेन-देन कराया गया और इसके बाद भी लगातार अतिरिक्त रकम की मांग की जाती रही. इसके अलावा, ट्विशा के साथ मानसिक और शारीरिक उत्पीड़न के आरोप भी सामने आए हैं। 

गर्भपात कराने का भी आरोप
एफआईआर के अनुसार, अप्रैल 2026 में ट्विशा गर्भवती थी. परिजनों का आरोप है कि पति और सास ने उसके चरित्र पर सवाल उठाते हुए दबाव बनाकर गर्भपात करवाया. यह आरोप मामले को और गंभीर बना रहे हैं, जिस पर सीबीआई विशेष रूप से जांच कर रही है। 

इन कानूनी धाराओं में दर्ज हुआ मामला
सीबीआई ने इस मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 80(2), 85 और 3(5) के साथ-साथ दहेज निषेध अधिनियम की धारा 3 और 4 के तहत प्रकरण दर्ज किया है. मध्यप्रदेश सरकार की सहमति के बाद केंद्र सरकार ने 25 मई को अधिसूचना जारी कर सीबीआई को जांच का अधिकार सौंपा था। 

डिजिटल और फॉरेंसिक साक्ष्य होंगे अहम
सीबीआई अब इस मामले में डिजिटल सबूतों की गहराई से जांच करेगी. व्हाट्सएप चैट्स, कॉल रिकॉर्ड्स, मेडिकल रिपोर्ट और अन्य दस्तावेजों के आधार पर घटनाक्रम को पुनर्निर्माण किया जाएगा. इसके साथ ही पोस्टमार्टम में मिले चोटों के निशान और उनके कारणों का भी विश्लेषण किया जाएगा। 

परिवार को निष्पक्ष जांच की उम्मीद
सीबीआई की एंट्री के बाद परिजनों को अब निष्पक्ष और सटीक जांच की उम्मीद जगी है. यह मामला न सिर्फ एक संदिग्ध मौत बल्कि दहेज प्रथा और घरेलू हिंसा जैसे गंभीर सामाजिक मुद्दों को भी उजागर करता है. आने वाले दिनों में आरोपी से पूछताछ और साक्ष्यों के आधार पर इस मामले में कई अहम खुलासे होने की संभावना है। 

चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच ने सोमवार को मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि वह सुनिश्चित करेगी कि इस मामले की जांच निष्पक्ष, स्वतंत्र और पूर्वाग्रह रहित हो। 

पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं और दहेज निषेध अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत केस दर्ज किया है. प्राथमिकी में ट्विशा के पति समर्थ सिंह और उनकी सास एवं पूर्व जिला न्यायाधीश गिरिबाला सिंह को नामजद किया गया है। 

दोनों परिवारों को सलाह- मीडिया से बात न करें
पीठ ने कहा, ‘‘हम पीड़ित परिवार के सदस्यों के साथ-साथ आरोपियों के परिवार के सदस्यों से भी कहना चाहेंगे कि वे सार्वजनिक रूप से या मीडिया मंचों पर बयान देने के बजाय जांच एजेंसी के समक्ष अपनी बात दर्ज कराएं, ताकि जारी जांच पर कोई प्रतिकूल प्रभाव न पड़े और कोई पूर्वाग्रह नहीं हो। 

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