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400 मवेशियों के साथ खादर में घुसे वन गुर्जर, वन विभाग ने 16 किमी तक खदेड़ा, सख्त कार्रवाई की चेतावनी

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बिजनौर

पौधे बचाने के लिए गंगा के खादर में लगभग 400 भैंसों के साथ आए वन गुर्जरों को वन विभाग की टीम ने खदेड़ दिया। टीम लगभग 16 किलोमीटर तक वन गुर्जर और उनकी भैंसों के पीछे चली व उन्हें अपने क्षेत्र से बाहर निकाल दिया। उन्हें फिर से उत्तराखंड जाने को कहा गया। इतना ही नहीं, फिर से खादर में दिखने पर कार्रवाई की चेतावनी दी गई हैं।

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खादर में वन विभाग, सिंचाई व राजस्व आदि विभागों की हजारों बीघा भूमि है। इस भूमि पर लोग अवैध कब्जा कर फसल बो देते हैं। हाल ही में वन विभाग ने लगभग 200 हेक्टेयर भूमि को अवैध कब्जे को मुक्त कर पौधारोपण किया है। पौधों के संरक्षण पर भी काम किया जा रहा है। उधर, खादर में वन गुर्जर भी आकर डेरा डाल देते हैं। इनके पशु पौधों को नुकसान पहुंचाते हैं।

शनिवार की रात उत्तराखंड की ओर से आए एक दर्जन से अधिक वन गुर्जरों ने रावली क्षेत्र में आकर डेरा डाल दिया। उनके पास 400 से अधिक भैंस व गाय थीं तथा लगभग एक हजार पशु एक दो दिन में आने वाले थे। क्षेत्रीय वनाधिकारी महेशचंद्र गौतम को इसका पता चला तो वे टीम के साथ मौके पर जा पहुंचे। उन्होंने वन गुर्जरों को फिर से उत्तराखंड की ओर ही जाने को कहा। इस बीच वन गुर्जरों ने किसान संगठनों के नेताओं से फोन भी कराए और एक दो किसान नेता वहां मौके पर आ भी गए, लेकिन वन विभाग ने किसी की नहीं सुनी।

रात नौ बजे वन गुर्जरों को उनके पशुओं सहित वहां से खदेड्ना शुरू कर दिया। रात को लगभग नौ बजे रावली क्षेत्र के गांव रतनपुर के पास से उन्होंने वन गुर्जरों को चंदक के रेलवे फाटक तक खदेड़ा। वन विभाग की टीम वन गुर्जरों और उनके पशुओं के पीछे पीछे ही चली। इस सब में रात के एक बज गए। वन गुर्जरों को गंगा के वन क्षेत्र में फिर न आने की चेतावनी दी गई।

खादर में डेरे बना लेते हैं वन गुर्जर

वन गुर्जर पशुपालन करते हैं। ये खादर में डेरे बना लेते हैं। पशु वहीं चरते हैं। इससे इनकी एक रुपये की लागत नहीं आती। बाढ़ आने पर कई बार प्रशासन ने टापुओं पर रहने वाले वन गुर्जरों को रेस्क्यू किया है। वन गुर्जरों को नाव से लाया जाता है, जबकि उनके पशु गंगा की धारा में आराम से तैरते हुए उनके पीछे आ जाते हैं।

आरक्षित वन क्षेत्र में डेरे नहीं बनाने दिए जाएंगे

वन गुर्जरों को आरक्षित वन क्षेत्र में डेरे नहीं बनाने दिए जाएंगे। इनके पौधे नए पौधरोपण को नष्ट कर देते हैं। वन संपदा को किसी को नष्ट नहीं करने दिया जाएगा। -महेश चंद्र गौतम, क्षेत्रीय वनाधिकारी

 

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