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यूपी में 69 किमी लंबी फोरलेन सड़क को मिली मंजूरी, लखनऊ समेत 3 जिलों में होगा विकास

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लखनऊ 

 उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से जुड़े तीन जिलों को राहत देने वाली 69 किलोमीटर लंबी नई फोरलेन सड़क परियोजना को मंजूरी मिल गई है। यह राजमार्ग लखनऊ के चिनहट क्षेत्र से शुरू होकर बाराबंकी, सीतापुर और आगे बहराइच तक बेहतर कनेक्टिविटी प्रदान करेगा।

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परियोजना के लिए भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया भी तेजी से आगे बढ़ रही है। यह परियोजना भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) की महत्वाकांक्षी एनएच-727 योजना का हिस्सा है, जिसके माध्यम से चहलारी घाट (बहराइच) तक निर्बाध संपर्क स्थापित होगा।
यातायात दबाव होगा कम

यह हाईवे कुर्सी रोड और अयोध्या-लखनऊ किसान पथ से जुड़कर सीतापुर, लखीमपुर और बहराइच की ओर जाने वाले यातायात का दबाव कम करेगा। औद्योगिक क्षेत्र देवा और तहसील फतेहपुर को जोड़ते हुए यह मार्ग सीतापुर के महमूदाबाद और घाघरा तटवर्ती क्षेत्रों तक आवागमन को सुगम बनाएगा। री परियोजना को तीन चरणों में विकसित किया जाएगा।

परियोजना का तीन चरणों में होगा निर्माण

    देवा से फतेहपुर (20 किमी)
    इस खंड के निर्माण पर लगभग 660 करोड़ रुपये खर्च होंगे।
    मार्ग सलारपुर, विशुनपुर, इसरौली, बसारा और रसूलपुर पनाह औद्योगिक क्षेत्र से होकर गुजरेगा।
    करीब 16 गांव सीधे इस फोरलेन से जुड़ेंगे।

अब तक 85 हेक्टेयर भूमि का अधिग्रहण पूरा किया जा चुका है और 2,000 से अधिक किसानों को मुआवजा प्रक्रिया से जोड़ा गया है।

    फतेहपुर से महमूदाबाद (22 किमी)
    इस हिस्से के फोरलेन निर्माण से सीतापुर तक सीधा और सुगम मार्ग उपलब्ध होगा।
    चिनहट से देवा व कुर्सी मार्ग (27.35 किमी)

इस खंड के चौड़ीकरण और सुदृढ़ीकरण पर 468.48 करोड़ रुपये खर्च होंगे। यह मार्ग किसान पथ से जुड़कर लखनऊ से सीधा संपर्क स्थापित करेगा।
बाइपास और पुलों का निर्माण

परियोजना में तीन नगरों के लिए बहुउद्देशीय बाइपास शामिल हैं, विशुनपुर में 2 किमी लंबा बाइपास, फतेहपुर में लगभग 3 किमी लंबा बाइपास, देवा में भी बाइपास का निर्माण प्रस्तावित है। इन बाइपास से रेलवे क्रॉसिंग और बाजार क्षेत्रों में लगने वाले जाम से राहत मिलेगी।

साथ ही, कल्याणी नदी और शारदा सहायक नहर पर चार नए पुलों सहित कुल सात पुलों का निर्माण किया जाएगा। ये सभी प्रावधान विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) में शामिल हैं।

क्षेत्रीय विकास को मिलेगा बढ़ावा

परियोजना पूरी होने के बाद लखनऊ, बाराबंकी और सीतापुर के बीच आवागमन तेज़ और सुविधाजनक होगा। इससे औद्योगिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा, निवेश आकर्षित होगा और क्षेत्रीय आर्थिक विकास को नई गति मिलेगी।

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