Home अध्यात्म गंडमूल नक्षत्र में जन्म: क्यों 27 दिन तक पिता को नहीं दिखाया...

गंडमूल नक्षत्र में जन्म: क्यों 27 दिन तक पिता को नहीं दिखाया जाता शिशु का मुख?

23
0
Jeevan Ayurveda

हिंदू ज्योतिष और मान्यताओं में गंडमूल नक्षत्र का विशेष महत्व माना गया है. जब भी किसी घर में बच्चे की किलकारी गूंजती है, तो खुशियों के साथ-साथ ग्रह-नक्षत्रों की गणना भी शुरू हो जाती है. इसी गणना में अगर गंडमूल का जिक्र आता है, तो अक्सर बड़े-बुजुर्ग पिता को बच्चे का चेहरा 27 दिन तक देखने से मना कर देते हैं. आइए जानते हैं कि इस परंपरा के पीछे की असल कहानी क्या है और इसमें पिता की ममता और ज्योतिष का क्या मेल है.

क्या होते हैं गंडमूल नक्षत्र?

Ad

ज्योतिष शास्त्र में कुल 27 नक्षत्र होते हैं. इनमें से 6 नक्षत्रों को गंडमूल नक्षत्र की श्रेणी में रखा गया है, अश्विनी, आश्लेषा, मघा, ज्येष्ठा, मूल और रेवती. माना जाता है कि जब राशि और नक्षत्र दोनों एक साथ समाप्त हो रहे हों और नए शुरू हो रहे हों (संधि काल), तो उस समय पैदा होने वाले बच्चों पर ग्रहों का प्रभाव थोड़ा भारी होता है. इसे ही गंड दोष कहा जाता है.

पिता को चेहरा न दिखाने के पीछे का तर्क!

अनिष्ट की आशंका: पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इन नक्षत्रों में जन्मे बच्चे का तेज इतना प्रबल और अलग होता है कि यदि पिता तुरंत उसे देख ले, तो पिता के स्वास्थ्य, मान-सम्मान या आर्थिक स्थिति पर बुरा असर पड़ सकता है.

27 दिनों का विज्ञान: चंद्रमा को सभी 27 नक्षत्रों का चक्र पूरा करने में लगभग 27 दिन लगते हैं. जब 27 दिन बाद वही नक्षत्र दोबारा आता है जिसमें बच्चे का जन्म हुआ था, तब गंडमूल शांति पूजा की जाती है. इस पूजा के बाद ही ग्रह शांत माने जाते हैं और पिता-पुत्र का मिलन शुभ माना जाता है.

भावनात्मक सुरक्षा: पुराने समय में इस नियम को इसलिए भी कड़ाई से माना जाता था ताकि परिवार पूरी सावधानी बरते और बच्चे व पिता के बीच एक सुरक्षा कवच बना रहे.

क्या वाकई यह डराने वाली बात है?

आज के आधुनिक दौर में कई लोग इसे अंधविश्वास मान सकते हैं, लेकिन गंडमूल में जन्मा बच्चा अशुभ नहीं होता होता है बस ज्योतिष के जानकार इसे सावधानी का नाम देते हैं.

पूजा और समाधान

नक्षत्र शांति: इसके नकारात्मक प्रभाव को दूर करने के लिए 27वें दिन मूल शांति’ या ‘सतैसा पूजा की जाती है.

दान-पुण्य: इस दौरान छाया दान कांसे की कटोरी में घी भरकर चेहरा देखना और दान करना का विशेष महत्व है.

पिता का मिलन: पूजा पूरी होने के बाद पिता शुभ मुहूर्त में अपने बच्चे को देख सकते हैं और उसे अपनी गोद में ले सकते हैं.

Jeevan Ayurveda Clinic

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here