Home मध्य प्रदेश मध्यप्रदेश में फिर घोटाले का खेल, वेतन घपले में ट्रेजरी अफसर सस्पेंड

मध्यप्रदेश में फिर घोटाले का खेल, वेतन घपले में ट्रेजरी अफसर सस्पेंड

49
0
Jeevan Ayurveda

भोपाल
मध्य प्रदेश में आयुक्त कोष एवं लेखा कार्यालय की जांच में 50 हजार शासकीय अधिकारियों-कर्मचारियों का डाटा अपडेट न पाए जाने का खुलासा होने के बाद अब शिवपुरी ऐसा दूसरा जिला सामने आया है जहां वेतन घोटाला किया गया। इससे पहले देवास जिले में भी इसी तरह का घपला पकड़ा गया था। शिवपुरी जिले में ट्रेजरी अधिकारी की मिली भगत से डेढ़ करोड़ रुपये का वेतन घोटाला पकड़ा गया है। शिवपुरी के खनियाधाना विकासखंड शिक्षा अधिकारी (बीईओ) कार्यालय के लेखापाल सुखनंदन रसगैया और जिला कोषालय कार्यालय में पदस्थ सहायक कोषालय अधिकारी मोहित कुशवाह ने मिलीभगत कर घोटाले को अंजाम दिया। इसमें सुखनंदन रसगैया ने हर माह अपना वेतन बढ़ाकर निकलवाया। इतना ही नहीं जो शिक्षक नहीं थे उन्हें भी शिक्षक बताकर उनके खाते में राशि डाली गई। अपनी पत्नी, बेटे समेत कई सगे संबंधियों को फर्जी तरीके से शिक्षक दर्शाकर उनके बैंक खातों में वेतन का भुगतान किया जाता रहा। इस घोटाले को वर्ष 2018 से अंजाम दिया जा रहा था।
 
वेतन पास करने के नाम पर 17.19 लाख रुपये रिश्वत ली
सहायक कोषालय अधिकारी मोहित कुशवाह ने फर्जी लोगों के वेतन पास करने के नाम पर 17.19 लाख रुपये रिश्वत ली, जिसे स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की शिवपुरी शाखा के अपने बैंक खाता में 10 अप्रैल 2023 से अप्रैल 2025 तक अलग-अलग किस्तों में जमा करवाए। घोटाले की भनक लगने पर आयुक्त कोष एवं लेखा भास्कर लक्षकार ने मामले की जांच कराई तो गड़बड़ी प्रमाणित पाई गई। इस मामले में सहायक कोषालय अधिकारी कुशवाह को निलंबित कर दिया है और बर्खास्त करने की कार्रवाई की जा रही है। लेखापाल सुखनंदन रसगैया के विरुद्ध एक मई 2025 को थाना खनियाधाना में एफआईआर दर्ज करा कर निलंबन की कार्रवाई की गई।

देवास में किया था ढाई करोड़ का घोटाला
मई माह में देवास जिले में ढाई करोड़ रुपये का घोटाला पकड़ में आया था। इसमें देवास जिले के बागली और हाटपीपल्या के शासकीय कालेज के लिपिकों और उप कोषालय के लिपिक हरि सिंह चौहान ने मिलकर वित्तीय गड़बड़ी की थी। शासकीय कॉलेज के लिपिकों ने कॉलेज की दो करोड़ 51 लाख रुपये की राशि निकालकर अपने और रिश्तेदारों के बैंक खातों में जमा कराया था। इसके बिल बनाकर उप कोषालय भेजे गए जहां उप कोषालय के चौहान ने इन्हें पास भी कर दिया था। जांच कस बाद ट्रेजरी लिपिक व दोनों कॉलेजों के लिपिकों को बर्खास्त कर दिया गया है।

Ad

सॉफ्टवेयर ने पकड़ी थी बड़ी चूक
आयुक्त कोष एवं लेखा कार्यालय की जांच में 50 हजार शासकीय अधिकारी-कर्मचारी ऐसे पाए गए थे जिनके ई-केवाईसी अपडेट नहीं थे। इसमें यह पता नहीं चल रहा था कि वे सेवानिवृत्त हो गए या प्रति नियुक्त पर हैं। वहीं इनका छह माह से वेतन आहरण ही नहीं हो रहा था। ऐसे में शक हुआ तो आयुक्त कोष एवं लेखा भास्कर लक्षकार ने सभी छह हजार आहरण एवं संवितरण अधिकारियों (डीडीओ) से रिपोर्ट मांगी थी। पड़ताल की गई तो तब यह बात सामने आई कि कुछ लोग प्रति नियुक्त पर हैं। तो कुछ फर्जी नामों पर भी वेतन आहरण हो रहा है।

लेखापाल के विरुद्ध एफआईआर दर्ज
मप्र कोष एवं लेखा के आयुक्त भास्कर लाक्षाकार ने कहा कि शिक्षा विभाग के लेखापाल और सहायक कोषालय अधिकारी द्वारा वित्तीय गड़बड़ी करना पाया गया है। लेखापाल के विरुद्ध एफआईआर दर्ज कराई गई है। सहायक कोषालय अधिकारी मोहित कुशवाह को निलंबित कर दिया गया है। बर्खास्त करने की कार्रवाई भी की जाएगी। 

Jeevan Ayurveda Clinic

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here