Home अध्यात्म जूते-चप्पल पहनकर खाना बनाना पड़ सकता है भारी! वास्तु के अनुसार घर...

जूते-चप्पल पहनकर खाना बनाना पड़ सकता है भारी! वास्तु के अनुसार घर में आ सकती है दरिद्रता

1
0
Jeevan Ayurveda

भारतीय संस्कृति में रसोईघर को घर का सबसे पवित्र हिस्सा माना जाता है। आखिर क्यों हमारे बड़े-बुजुर्ग हमेशा रसोई में चप्पल ले जाने से मना करते थे और वास्तु शास्त्र इस बारे में क्या चेतावनी देता है।

किचन सिर्फ खाना पकाने की जगह नहीं है, बल्कि यहां धन और धान्य की देवी मां अन्नपूर्णा का वास होता है। जब हम बाहर से गंदे जूते-चप्पल पहनकर किचन में जाते हैं, तो हम अनजाने में देवी का अपमान कर रहे होते हैं।

Ad

प्राचीन वास्तु ग्रंथों जैसे 'वास्तु राजवल्लभ' और 'समरांगण सूत्रधार' में घर के दो हिस्सों को हमेशा सबसे शुद्ध रखने पर जोर दिया गया है- पहला पूजा घर और दूसरा रसोईघर।

वास्तु शास्त्र के अनुसार, जूते-चप्पलों के साथ राहु और केतु (नकारात्मक ऊर्जा) का प्रभाव जुड़ा होता है। जब यह नकारात्मक ऊर्जा किचन में पहुंचती है, तो खाने के जरिए पूरे परिवार के शरीर में प्रवेश कर जाती है। इससे घर में बीमारियां बढ़ती हैं, बेवजह के झगड़े होते हैं और घर की बरकत (धन) रुक जाती है।

वैज्ञानिक नजरिया क्या है?
अगर धार्मिक नजरिए से हटकर देखें, तो भी यह आदत बहुत नुकसानदायक है। हमारे जूतों में बाहर की सड़कों की गंदगी, कीटाणु और बैक्टीरिया चिपके होते हैं। जब वही चप्पलें किचन में जाती हैं, तो वह गंदगी हमारे खाने तक पहुंच सकती है, जिससे परिवार का स्वास्थ्य बिगड़ सकता है।

अगर पहनना मजबूरी हो तो क्या करें?

कई बार सर्दियों के मौसम में फर्श बहुत ठंडा होता है या किसी को जोड़ों के दर्द (Medical Issue) की वजह से चप्पल पहनना जरूरी होता है। ऐसे में वास्तु का एक आसान सा उपाय है:

    अपने किचन के लिए एक अलग, साफ 'कपड़े या ऊन की चप्पल' रखें।

    इस चप्पल को पहनकर घर के बाहर या बाथरूम में बिल्कुल न जाएं।

    किचन में देवी अन्नपूर्णा और अग्नि देव का वास होता है, अशुद्ध पैरों से वहां जाना उनका सीधा अपमान है।

    बाहर की चप्पलें किचन में ले जाने से घर में नकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है, जिससे आर्थिक तंगी (पैसे की कमी) आ सकती है।

 

Jeevan Ayurveda Clinic

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here