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ईरान में अमेरिका की रणनीति फेल? खामेनेई के बेटे की सत्ता को खतरा नहीं

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वाशिंगटन
अमेरिका और इजरायल बीते 13 दिनों से ईरान पर लगातार हमले कर रहे हैं। शुरुआती दिनों ही ईरान के शीर्ष नेता अयातुल्लाह खामेनेई मारे गए थे, लेकिन अब भी देश की जनता का भरोसा अपने नेतृत्व पर कायम है। यह बात तो खुद अमेरिकी एजेंसियों ने भी स्वीकार की है। अमेरिकी इंटेलिजेंस सूत्रों का कहना है कि ईरान की सरकार गिरने का फिलहाल कोई संकेत नहीं है। इसकी वजह यह है कि अब भी जनता पर उसकी पकड़ बनी हुई है। तीन अमेरिकी खुफिया सूत्रों ने कहा कि ईरान की जनता पर लीडरशिप की पकड़ कायम है। इसका अर्थ यह है कि अयातुल्लाह खामेनेई के बेटे मुजतबा खामेनेई को जनता ने स्वीकार कर लिया है।

सूत्रों का कहना है कि अमेरिकी खुफिया एजेंसियों ने बीते कुछ दिनों में यह जानकारी निकाली है। दुनिया भर में तेल की कीमतों में तेजी से इजाफा हुआ है। इसके अलावा गैस की भी किल्लत हो रही है। शायद इसी को ध्यान में रखते हुए अमेरिका का कहना है कि हम जल्दी ही जंग खत्म कर सकते हैं। लेकिन यह ईरान के नेतृत्व का शायद जज्बा है या फिर उसे मिल रहा जनता का समर्थन है कि उसका कहना है कि जंग भले ही अमेरिका ने शुरू की थी, लेकिन इसे अब खत्म हम ही करेंगे। यह बात दिलचस्प है कि ईरान के शीर्ष नेता मारे गए हैं। फिर भी उसकी नई लीडरशिप को जनता ने ना सिर्फ स्वीकार किया है बल्कि उसके साथ खड़ी है।

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ईरानी लीडरशिप को मिली ताकत से कैसे अमेरिका को झटका
यह अहम इसलिए भी है क्योंकि अमेरिका को उम्मीद थी कि खामेनेई के मारे जाने के बाद ईरान की जनता सड़कों पर होगी। फिर लोकतंत्र बहाली के नाम पर वह दखल दे सकेगा और अपने किसी करीबी को कमान सौंपा देगा। निर्वासित क्राउन प्रिंस रजा पहलवी को ऐसी उम्मीदें भी थीं, लेकिन जनता ने खामेनेई के बेटे को ही लीडर मान लिया है। ऐसे हालात तब हैं, जबकि अमेरिका लगातार हमले कर रहा है और मुजतबा खुद भी खतरे में हैं।

जंग के पहले ही दिन मारे गए थे अयातुल्लाह खामेनेई, अब तक नहीं निकला जनाजा
बता दें कि जंग के पहले ही दिन अयातुल्लाह खामेनेई मारे गए थे। उनका तब से अब तक जनाजा नहीं निकाला गया है। माना जा रहा है कि इस नमाज-ए-जनाजा में करोड़ों की भीड़ जुटेगी। इसी के कारण ईरानी लीडरशिप उन्हें अभी दफनाने से बच रहा है। यदि ऐसा कोई आयोजन हुआ तो अमेरिका और इजरायल एक बार फिर से बड़ी तबाही कर सकते हैं। सूत्रों का कहना है कि सीजफायर के हालात बनने पर ही शायद अब खामेनेई का अंतिम संस्कार किया जाएगा।

 

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